श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.43.34

दशम स्कन्ध · अध्याय 43 · अथ त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः

नित्यं प्रमुदिता गोपा वत्सपाला यथा स्फुटम्।

वनेषु मल्लयुद्धेन क्रीडन्तश्‍चारयन्ति गाः॥ ३४

nityaṃ pramuditā gopā vatsapālā yathā sphuṭam|

vaneṣu mallayuddhena krīḍantaścārayanti gāḥ|| 34

अर्थ

यह सभी जानते हैं कि गाय और बछड़े चरानेवाले ग्वालिये प्रतिदिन आनन्दसे जंगलोंमें कुश्ती लड़-लड़कर खेलते रहते हैं और गायें चराते रहते हैं॥ ३४॥

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