॥ श्रीहरिः ॥
तेषु पौरा जानपदा ब्रह्मक्षत्रपुरोगमाः।
यथोपजोषं विविशू राजानश्च कृतासनाः॥ ३४
teṣu paurā jānapadā brahmakṣatrapurogamāḥ|
yathopajoṣaṃ viviśū rājānaśca kṛtāsanāḥ|| 34
अर्थ
उनपर ब्राह्मण, क्षत्रिय आदि नागरिक तथा ग्रामवासी—सब यथास्थान बैठ गये। राजालोग भी अपने-अपने निश्चित स्थानपर जा डटे॥ ३४॥
तेषु पौरा जानपदा ब्रह्मक्षत्रपुरोगमाः।
यथोपजोषं विविशू राजानश्च कृतासनाः॥ ३४
उनपर ब्राह्मण, क्षत्रिय आदि नागरिक तथा ग्रामवासी—सब यथास्थान बैठ गये। राजालोग भी अपने-अपने निश्चित स्थानपर जा डटे॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.42.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 396) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/42/34/