॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.41.44
तयोरासनमानीय पाद्यं चार्घ्यार्हणादिभिः।
पूजां सानुगयोश्चक्रे स्रक्ताम्बूलानुलेपनैः॥ ४४
tayorāsanamānīya pādyaṃ cārghyārhaṇādibhiḥ|
pūjāṃ sānugayoścakre sraktāmbūlānulepanaiḥ|| 44
अर्थ
फिर उनको आसनपर बैठाकर उनके पाँव पखारे, हाथ धुलाये और तदनन्तर ग्वालबालोंके सहित सबकी फूलोंके हार, पान, चन्दन आदि सामग्रियोंसे विधिपूर्वक पूजा की॥ ४४॥