भगवान्ने कहा—‘भाई! तुम हमें ऐसे वस्त्र दो, जो हमारे शरीरमें पूरे-पूरे आ जायँ। वास्तवमें हमलोग उन वस्त्रोंके अधिकारी हैं। इसमें सन्देह नहीं कि यदि तुम हमलोगोंको वस्त्र दोगे तो तुम्हारा परम कल्याण होगा’॥ ३३॥
देह्यावयोः समुचितान्यंग वासांसि चार्हतोः।
भविष्यति परं श्रेयो दातुस्ते नात्र संशयः॥ ३३
भगवान्ने कहा—‘भाई! तुम हमें ऐसे वस्त्र दो, जो हमारे शरीरमें पूरे-पूरे आ जायँ। वास्तवमें हमलोग उन वस्त्रोंके अधिकारी हैं। इसमें सन्देह नहीं कि यदि तुम हमलोगोंको वस्त्र दोगे तो तुम्हारा परम कल्याण होगा’॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.41.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 390) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/41/33/