प्रह्लाद-जैसे साधुजनोंका भय मिटानेवाले प्रभो! आपके उस अलौकिक नृसिंह-रूपको मैं नमस्कार करता हूँ। आपने वामनरूप ग्रहण करके अपने पगोंसे तीनों लोक नाप लिये थे, आपको मैं नमस्कार करता हूँ॥ १९॥✎ 1928
नमस्तेऽद्भुतसिंहाय साधुलोकभयापह।
वामनाय नमस्तुभ्यं क्रान्तत्रिभुवनाय च॥ १९
प्रह्लाद-जैसे साधुजनोंका भय मिटानेवाले प्रभो! आपके उस अलौकिक नृसिंह-रूपको मैं नमस्कार करता हूँ। आपने वामनरूप ग्रहण करके अपने पगोंसे तीनों लोक नाप लिये थे, आपको मैं नमस्कार करता हूँ॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.40.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 384) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/40/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1928 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): यदु-वंशियोंका → यदुवंशियोंका