श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.4.32

दशम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

किमुद्यमैः करिष्यन्ति देवाः समरभीरवः।

नित्यमुद्वि‌ग्‍नमनसो ज्याघोषैर्धनुषस्तव॥ ३२

kimudyamaiḥ kariṣyanti devāḥ samarabhīravaḥ|

nityamudvignamanaso jyāghoṣairdhanuṣastava|| 32

अर्थ

समरभीरु देवगण युद्धोद्योग करके ही क्या करेंगे? वे तो आपके धनुषकी टंकार सुनकर ही सदा-सर्वदा घबराये रहते हैं॥ ३२॥

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