श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.4.26

दशम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

एवमेतन्महाभाग३ यथा वदसि देहिनाम्।

अज्ञानप्रभवाहंधीः स्वपरेति भिदा यतः॥ २६

evametanmahābhāga yathā vadasi dehinām|

ajñānaprabhavāhaṃdhīḥ svapareti bhidā yataḥ|| 26

अर्थ

‘मनस्वी कंस! आप जो कहते हैं, वह ठीक वैसा ही है। जीव अज्ञानके कारण ही शरीर आदिको ‘मैं’ मान बैठते हैं। इसीसे अपने परायेका भेद हो जाता है॥ २६॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    राज।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 148)

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