वे तुरन्त भोजराज कंसके पास गये और देवकीको सन्तान होनेकी बात कही। कंस तो बड़ी आकुलता और घबराहटके साथ इसी बातकी प्रतीक्षा कर रहा था॥ २॥
ते तु तूर्णमुपव्रज्य देवक्या गर्भजन्म तत्।
आचख्युर्भोजराजाय यदुद्विग्नः प्रतीक्षते॥ २
वे तुरन्त भोजराज कंसके पास गये और देवकीको सन्तान होनेकी बात कही। कंस तो बड़ी आकुलता और घबराहटके साथ इसी बातकी प्रतीक्षा कर रहा था॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.4.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 145) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/4/2/