श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.39.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 39 · अथैकोनचत्वारिंशोऽध्यायः

किमलभ्यं भगवति प्रसन्‍ने श्रीनिकेतने।

तथापि तत्परा राजन्‍न हि वाञ्छन्ति किंचन॥ २

kimalabhyaṃ bhagavati prasanne śrīniketane|

tathāpi tatparā rājanna hi vāñchanti kiṃcana|| 2

अर्थ

परीक्षित्! लक्ष्मीके आश्रयस्थान भगवान् श्रीकृष्णके प्रसन्‍न होनेपर ऐसी कौन-सी वस्तु है, जो प्राप्त नहीं हो सकती? फिर भी भगवान्‌के परमप्रेमी भक्तजन किसी भी वस्तुकी कामना नहीं करते॥ २॥

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