श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.38.34

दशम स्कन्ध · अध्याय 38 · अथाष्टात्रिंशोऽध्यायः

रथात्तूर्णमवप्लुत्य सोऽक्रूरः स्नेहविह्वलः।

पपात चरणोपान्ते दण्डवद् रामकृष्णयोः॥ ३४

rathāttūrṇamavaplutya so'krūraḥ snehavihvalaḥ|

papāta caraṇopānte daṇḍavad rāmakṛṣṇayoḥ|| 34

अर्थ

उन्हें देखते ही अक्रूरजी प्रेमावेगसे अधीर होकर रथसे कूद पड़े और भगवान् श्रीकृष्ण तथा बलरामके चरणोंके पास साष्टांग लोट गये॥ ३४॥

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