श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.36.5

दशम स्कन्ध · अध्याय 36 · अथ षट्त्रिंशोऽध्यायः

तं तीक्ष्णशृङ्गमुद्वीक्ष्य गोप्यो गोपाश्‍च तत्रसुः।

पशवो दुद्रुवुर्भीता राजन् संत्यज्य गोकुलम्॥ ५

taṃ tīkṣṇaśṛṅgamudvīkṣya gopyo gopāśca tatrasuḥ|

paśavo dudruvurbhītā rājan saṃtyajya gokulam|| 5

अर्थ

परीक्षित्! उस तीखे सींगवाले बैलको देखकर गोपियाँ और गोप सभी भयभीत हो गये। पशु तो इतने डर गये कि अपने रहनेका स्थान छोड़कर भाग ही गये॥ ५॥

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