श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.36.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 36 · अथ षट्त्रिंशोऽध्यायः

अरिष्टे निहते दैत्ये कृष्णेनाद्भुतकर्मणा।

कंसायाथाह भगवान् नारदो देवदर्शनः॥ १६

ariṣṭe nihate daitye kṛṣṇenādbhutakarmaṇā|

kaṃsāyāthāha bhagavān nārado devadarśanaḥ|| 16

अर्थ

परीक्षित्! भगवान्‌की लीला अत्यन्त अद्भुत है। इधर जब उन्होंने अरिष्टासुरको मार डाला, तब भगवन्मय नारद, जो लोगोंको शीघ्र-से-शीघ्र भगवान्‌का दर्शन कराते रहते हैं, कंसके पास पहुँचे। उन्होंने उससे कहा—॥ १६॥

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