श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.36.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 36 · अथ षट्त्रिंशोऽध्यायः

गृहीत्वा शृङ्गयोस्तं वा अष्टादश पदानि सः।

प्रत्यपोवाह भगवान् गजः प्रतिगजं यथा॥ ११

gṛhītvā śṛṅgayostaṃ vā aṣṭādaśa padāni saḥ|

pratyapovāha bhagavān gajaḥ pratigajaṃ yathā|| 11

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने अपने दोनों हाथोंसे उसके दोनों सींग पकड़ लिये और जैसे एक हाथी अपनेसे भिड़नेवाले दूसरे हाथीको पीछे हटा देता है, वैसे ही उन्होंने उसे अठारह पग पीछे ठेलकर गिरा दिया॥ ११॥

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