श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.34.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 34 · अथ चतुस्त्रिंशोऽध्यायः

स चुक्रोशाहिना ग्रस्तः कृष्ण कृष्ण महानयम्।

सर्पो मां ग्रसते तात प्रपन्‍नं परिमोचय॥ ६

sa cukrośāhinā grastaḥ kṛṣṇa kṛṣṇa mahānayam|

sarpo māṃ grasate tāta prapannaṃ parimocaya|| 6

अर्थ

अजगरके पकड़ लेनेपर नन्दरायजी चिल्लाने लगे—‘बेटा कृष्ण! कृष्ण! दौड़ो, दौड़ो। देखो बेटा! यह अजगर मुझे निगल रहा है। मैं तुम्हारी शरणमें हूँ। जल्दी मुझे इस संकटसे बचाओ’॥ ६॥✎ 1670 2092

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1670 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: सर्वांग-सुन्दर → सर्वांगसुन्दर
  • #2092 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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