श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.34.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 34 · अथ चतुस्त्रिंशोऽध्यायः

तमन्वधावद् गोविन्दो यत्र यत्र स धावति।

जिहीर्षुस्तच्छिरोरत्‍नं तस्थौ रक्षन् स्त्रियो बलः॥ ३०

tamanvadhāvad govindo yatra yatra sa dhāvati|

jihīrṣustacchiroratnaṃ tasthau rakṣan striyo balaḥ|| 30

अर्थ

तब स्त्रियोंकी रक्षा करनेके लिये बलरामजी तो वहीं खड़े रह गये, परन्तु भगवान् श्रीकृष्ण जहाँ-जहाँ वह भागकर गया, उसके पीछे-पीछे दौड़ते गये। वे चाहते थे कि उसके सिरकी चूड़ामणि निकाल लें॥ ३०॥

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