श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.34.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 34 · अथ चतुस्त्रिंशोऽध्यायः

स वीक्ष्य तावनुप्राप्तौ कालमृत्यू इवोद्विजन्।

विसृज्य स्त्रीजनं मूढः प्राद्रवज्जीवितेच्छया॥ २९

sa vīkṣya tāvanuprāptau kālamṛtyū ivodvijan|

visṛjya strījanaṃ mūḍhaḥ prādravajjīvitecchayā|| 29

अर्थ

यक्षने देखा कि काल और मृत्युके समान ये दोनों भाई मेरे पास आ पहुँचे। तब वह मूढ़ घबड़ा गया। उसने गोपियोंको वहीं छोड़ दिया, स्वयं प्राण बचानेके लिये भागा॥ २९॥

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