जिस समय बलराम और श्याम दोनों भाई इस प्रकार स्वच्छन्द विहार कर रहे थे और उन्मत्तकी भाँति गा रहे थे, उसी समय वहाँ शंखचूड नामक एक यक्ष आया। वह कुबेरका अनुचर था॥ २५॥
एवं विक्रीडतोः स्वैरं गायतोः सम्प्रमत्तवत्।
शंखचूड इति ख्यातो धनदानुचरोऽभ्यगात्॥ २५
जिस समय बलराम और श्याम दोनों भाई इस प्रकार स्वच्छन्द विहार कर रहे थे और उन्मत्तकी भाँति गा रहे थे, उसी समय वहाँ शंखचूड नामक एक यक्ष आया। वह कुबेरका अनुचर था॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.34.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 349) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/34/25/