श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.34.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 34 · अथ चतुस्त्रिंशोऽध्यायः

कदाचिदथ गोविन्दो रामश्‍चाद्भुतविक्रमः।

विजह्रतुर्वने रात्र्यां मध्यगौ व्रजयोषिताम्॥ २०

kadācidatha govindo rāmaścādbhutavikramaḥ|

vijahraturvane rātryāṃ madhyagau vrajayoṣitām|| 20

अर्थ

एक दिनकी बात है, अलौकिक कर्म करनेवाले भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी रात्रिके समय वनमें गोपियोंके साथ विहार कर रहे थे॥ २०॥

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