श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.33.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 33 · अथ त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः

तत्रातिशुशुभे ताभिर्भगवान् देवकीसुतः।

मध्ये मणीनां हैमानां महामरकतो यथा॥ ७

tatrātiśuśubhe tābhirbhagavān devakīsutaḥ|

madhye maṇīnāṃ haimānāṃ mahāmarakato yathā|| 7

अर्थ

यमुनाजीकी रमणरेतीपर व्रजसुन्दरियोंके बीचमें भगवान् श्रीकृष्णकी बड़ी अनोखी शोभा हुई। ऐसा जान पड़ता था, मानो अगणित पीली-पीली दमकती हुई सुवर्ण-मणियोंके बीचमें ज्योतिर्मयी नीलमणि चमक रही हो॥ ७॥✎ 2090

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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