॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.33.6
वलयानां नूपुराणां किंकिणीनां च योषिताम्।
सप्रियाणामभूच्छब्दस्तुमुलो रासमण्डले॥ ६
valayānāṃ nūpurāṇāṃ kiṃkiṇīnāṃ ca yoṣitām|
sapriyāṇāmabhūcchabdastumulo rāsamaṇḍale|| 6
अर्थ
रासमण्डलमें सभी गोपियाँ अपने प्रियतम श्यामसुन्दरके साथ नृत्य करने लगीं। उनकी कलाइयोंके कंगन, पैरोंके पायजेब और करधनीके छोटे-छोटे घुँघरू एक साथ बज उठे। असंख्य गोपियाँ थीं, इसलिये यह मधुर ध्वनि भी बड़े ही जोरकी हो रही थी॥ ६॥✎ 2090