भगवान् श्रीकृष्णकी यह रासक्रीडा देखकर स्वर्गकी देवांगनाएँ भी मिलनकी कामनासे मोहित हो गयीं और समस्त तारों तथा ग्रहोंके साथ चन्द्रमा चकित, विस्मित हो गये॥ १९॥✎ 1669
कृष्णविक्रीडितं वीक्ष्य मुमुहुः खेचरस्त्रियः।
कामार्दिताः शशांकश्च सगणो विस्मितोऽभवत्॥ १९
भगवान् श्रीकृष्णकी यह रासक्रीडा देखकर स्वर्गकी देवांगनाएँ भी मिलनकी कामनासे मोहित हो गयीं और समस्त तारों तथा ग्रहोंके साथ चन्द्रमा चकित, विस्मित हो गये॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.33.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 334) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/33/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)