cakṣūṃṣyāśvapidadhvaṃ vo vidhāsye kṣemamaṃjasā|| 22
अर्थ
इतनेमें ही एक गोपी बोली—‘अरे ग्वालो! देखो, वनमें बड़ी भयंकर आग लगी है। तुमलोग जल्दी-से-जल्दी अपनी आँखें मूँद लो, मैं अनायास ही तुमलोगोंकी रक्षा कर लूँगा’॥ २२॥✎ 1431
तत्रैकोवाच हे गोपा दावाग्निं पश्यतोल्बणम्।
चक्षूंष्याश्वपिदध्वं वो विधास्ये क्षेममंजसा॥ २२
इतनेमें ही एक गोपी बोली—‘अरे ग्वालो! देखो, वनमें बड़ी भयंकर आग लगी है। तुमलोग जल्दी-से-जल्दी अपनी आँखें मूँद लो, मैं अनायास ही तुमलोगोंकी रक्षा कर लूँगा’॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.30.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 320) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/30/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)