तुम्हें मेरे-जैसा पुत्र होनेका वर प्राप्त हो गया और मैं वहाँसे चला गया। अब सफलमनोरथ होकर तुमलोग विषयोंका भोग करने लगे॥ ४०॥
गते मयि युवां लब्ध्वा वरं मत्सदृशं सुतम्।
ग्राम्यान् भोगानभुञ्जाथां युवां प्राप्तमनोरथौ॥ ४०
तुम्हें मेरे-जैसा पुत्र होनेका वर प्राप्त हो गया और मैं वहाँसे चला गया। अब सफलमनोरथ होकर तुमलोग विषयोंका भोग करने लगे॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.3.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 142) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/3/40/