उस समयतक विषय-भोगोंसे तुम लोगोंका कोई सम्बन्ध नहीं हुआ था। तुम्हारे कोई सन्तान भी न थी। इसलिये मेरी मायासे मोहित होकर तुम दोनोंने मुझसे मोक्ष नहीं माँगा॥ ३९॥
अजुष्टग्राम्यविषयावनपत्यौ च दम्पती।
न वव्राथेऽपवर्गं मे मोहितौ मम मायया॥ ३९
उस समयतक विषय-भोगोंसे तुम लोगोंका कोई सम्बन्ध नहीं हुआ था। तुम्हारे कोई सन्तान भी न थी। इसलिये मेरी मायासे मोहित होकर तुम दोनोंने मुझसे मोक्ष नहीं माँगा॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.3.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 142) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/3/39/