॥ श्रीहरिः ॥
एवं वां तप्यतोस्तीव्रं तपः परमदुष्करम्।
दिव्यवर्षसहस्राणि द्वादशेयुर्मदात्मनोः॥ ३६
evaṃ vāṃ tapyatostīvraṃ tapaḥ paramaduṣkaram|
divyavarṣasahasrāṇi dvādaśeyurmadātmanoḥ|| 36
अर्थ
मुझमें चित्त लगाकर ऐसा परम दुष्कर और घोर तप करते-करते देवताओंके बारह हजार वर्ष बीत गये॥ ३६॥
एवं वां तप्यतोस्तीव्रं तपः परमदुष्करम्।
दिव्यवर्षसहस्राणि द्वादशेयुर्मदात्मनोः॥ ३६
मुझमें चित्त लगाकर ऐसा परम दुष्कर और घोर तप करते-करते देवताओंके बारह हजार वर्ष बीत गये॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.3.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 142) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/3/36/