॥ श्रीहरिः ॥
युवां वै ब्रह्मणाऽऽदिष्टौ प्रजासर्गे यदा ततः।
सन्नियम्येन्द्रियग्रामं तेपाथे परमं तपः॥ ३३
yuvāṃ vai brahmaṇā''diṣṭau prajāsarge yadā tataḥ|
sanniyamyendriyagrāmaṃ tepāthe paramaṃ tapaḥ|| 33
अर्थ
जब ब्रह्माजीने तुम दोनोंको सन्तान उत्पन्न करनेकी आज्ञा दी, तब तुमलोगोंने इन्द्रियोंका दमन करके उत्कृष्ट तपस्या की॥ ३३॥
युवां वै ब्रह्मणाऽऽदिष्टौ प्रजासर्गे यदा ततः।
सन्नियम्येन्द्रियग्रामं तेपाथे परमं तपः॥ ३३
जब ब्रह्माजीने तुम दोनोंको सन्तान उत्पन्न करनेकी आज्ञा दी, तब तुमलोगोंने इन्द्रियोंका दमन करके उत्कृष्ट तपस्या की॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.3.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 142) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/3/33/