श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.3.33

दशम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

युवां वै ब्रह्मणाऽऽदिष्टौ प्रजासर्गे यदा ततः।

सन्‍नियम्येन्द्रियग्रामं तेपाथे परमं तपः॥ ३३

yuvāṃ vai brahmaṇā''diṣṭau prajāsarge yadā tataḥ|

sanniyamyendriyagrāmaṃ tepāthe paramaṃ tapaḥ|| 33

अर्थ

जब ब्रह्माजीने तुम दोनोंको सन्तान उत्पन्‍न करनेकी आज्ञा दी, तब तुमलोगोंने इन्द्रियोंका दमन करके उत्कृष्ट तपस्या की॥ ३३॥

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