tadbandhūnāṃ ca kalyāṇyaḥ prajānāṃ cānupoṣaṇam|| 24
अर्थ
कल्याणी गोपियो! स्त्रियोंका परम धर्म यही है कि वे पति और उसके भाई-बन्धुओंकी निष्कपटभावसे सेवा करें और सन्तानका पालन-पोषण करें॥ २४॥✎ 1818
भर्तुः शुश्रूषणं स्त्रीणां परो धर्मो ह्यमायया।
तद्बन्धूनां च कल्याण्यः प्रजानां चानुपोषणम्॥ २४
कल्याणी गोपियो! स्त्रियोंका परम धर्म यही है कि वे पति और उसके भाई-बन्धुओंकी निष्कपटभावसे सेवा करें और सन्तानका पालन-पोषण करें॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.29.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 311) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/29/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1818 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): सेवा → और सतियोंकी सेवा