श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.27.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

ये मद्विधाज्ञा जगदीशमानिन-

स्त्वां वीक्ष्य कालेऽभयमाशु तन्मदम्।

हित्वाऽऽर्यमार्गं प्रभजन्त्यपस्मया

ईहा खलानामपि तेऽनुशासनम्॥ ७

ye madvidhājñā jagadīśamānina-

stvāṃ vīkṣya kāle'bhayamāśu tanmadam|

hitvā''ryamārgaṃ prabhajantyapasmayā

īhā khalānāmapi te'nuśāsanam|| 7

अर्थ

प्रभो! जो मेरे-जैसे अज्ञानी और अपनेको जगत‍्का ईश्‍वर माननेवाले हैं, वे जब देखते हैं कि बड़े-बड़े भयके अवसरोंपर भी आप निर्भय रहते हैं, तब वे अपना घमंड छोड़ देते हैं और गर्वरहित होकर संतपुरुषोंके द्वारा सेवित भक्तिमार्गका आश्रय लेकर आपका भजन करते हैं। प्रभो! आपकी एक-एक चेष्टा दुष्टोंके लिये दण्डविधान है॥ ७॥

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