श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.27.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

इन्द्रं नस्त्वाभिषेक्ष्यामो ब्रह्मणा नोदिता वयम्।

अवतीर्णोऽसि विश्‍वात्मन् भूमेर्भारापनुत्तये॥ २१

indraṃ nastvābhiṣekṣyāmo brahmaṇā noditā vayam|

avatīrṇo'si viśvātman bhūmerbhārāpanuttaye|| 21

अर्थ

हम गौएँ ब्रह्माजीकी प्रेरणासे आपको अपना इन्द्र मानकर अभिषेक करेंगी। विश्‍वात्मन्! आपने पृथ्वीका भार उतारनेके लिये ही अवतार धारण किया है॥ २१॥

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