श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.27.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

स्वच्छन्दोपात्तदेहाय विशुद्धज्ञानमूर्तये।

सर्वस्मै सर्वबीजाय सर्वभूतात्मने नमः॥ ११

svacchandopāttadehāya viśuddhajñānamūrtaye|

sarvasmai sarvabījāya sarvabhūtātmane namaḥ|| 11

अर्थ

आपने जीवोंके समान कर्मवश होकर नहीं, स्वतन्त्रतासे अपने भक्तोंकी तथा अपनी इच्छाके अनुसार शरीर स्वीकार किया है। आपका यह शरीर भी विशुद्ध-ज्ञानस्वरूप है। आप सब कुछ हैं, सबके कारण हैं और सबके आत्मा हैं। मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ॥ ११॥

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