॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.26.4
तोकेनामीलिताक्षेण पूतनाया महौजसः।
पीतः स्तनः सह प्राणैः कालेनेव वयस्तनोः॥ ४
tokenāmīlitākṣeṇa pūtanāyā mahaujasaḥ|
pītaḥ stanaḥ saha prāṇaiḥ kāleneva vayastanoḥ|| 4
अर्थ
यह साधारण मनुष्यके लिये भला कैसे सम्भव है? जब यह नन्हा-सा बच्चा था, उस समय बड़ी भयंकर राक्षसी पूतना आयी और इसने आँख बंद किये-किये ही उसका स्तन तो पिया ही, प्राण भी पी डाले— ठीक वैसे ही, जैसे काल शरीरकी आयुको निगल जाता है॥ ४॥