श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.26.3

दशम स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

यः सप्तहायनो बालः करेणैकेन लीलया।

कथं बिभ्रद् गिरिवरं पुष्करं गजराडिव॥ ३

yaḥ saptahāyano bālaḥ kareṇaikena līlayā|

kathaṃ bibhrad girivaraṃ puṣkaraṃ gajarāḍiva|| 3

अर्थ

जैसे गजराज कोई कमल उखाड़कर उसे ऊपर उठा ले और धारण करे, वैसे ही इस नन्हें-से सात वर्षके बालकने एक ही हाथसे गिरिराज गोवर्द्धनको उखाड़ लिया और खेल-खेलमें सात दिनोंतक उठाये रखा॥ ३॥

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