॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.25.31
दिवि देवगणाः साध्याः सिद्धगन्धर्वचारणाः।
तुष्टुवुर्मुमुचुस्तुष्टाः पुष्पवर्षाणि पार्थिव॥ ३१
divi devagaṇāḥ sādhyāḥ siddhagandharvacāraṇāḥ|
tuṣṭuvurmumucustuṣṭāḥ puṣpavarṣāṇi pārthiva|| 31
अर्थ
परीक्षित्! उस समय आकाशमें स्थित देवता, साध्य, सिद्ध, गन्धर्व और चारण आदि प्रसन्न होकर भगवान्की स्तुति करते हुए उनपर फूलोंकी वर्षा करने लगे॥ ३१॥