श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.25.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

यशोदा रोहिणी नन्दो रामश्‍च बलिनां वरः।

कृष्णमालिङ्‌ग्‍य युयुजुराशिषः स्नेहकातराः॥ ३०

yaśodā rohiṇī nando rāmaśca balināṃ varaḥ|

kṛṣṇamāliṅgya yuyujurāśiṣaḥ snehakātarāḥ|| 30

अर्थ

यशोदारानी, रोहिणीजी, नन्दबाबा और बलवानोंमें श्रेष्ठ बलरामजीने स्नेहातुर होकर श्रीकृष्णको हृदयसे लगा लिया तथा आशीर्वाद दिये॥ ३०॥

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