श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.24.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

कर्मणा जायते जन्तुः कर्मणैव विलीयते।

सुखं दुःखं भयं क्षेमं कर्मणैवाभिपद्यते॥ १३

karmaṇā jāyate jantuḥ karmaṇaiva vilīyate|

sukhaṃ duḥkhaṃ bhayaṃ kṣemaṃ karmaṇaivābhipadyate|| 13

अर्थ

श्रीभगवान्‌ने कहा—पिताजी! प्राणी अपने कर्मके अनुसार ही पैदा होता और कर्मसे ही मर जाता है। उसे उसके कर्मके अनुसार ही सुख-दुःख, भय और मंगलके निमित्तोंकी प्राप्ति होती है॥ १३॥

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