श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! ब्रह्मा, शंकर आदिके भी शासन करनेवाले केशव भगवान्ने नन्दबाबा और दूसरे व्रजवासियोंकी बात सुनकर इन्द्रको क्रोध दिलानेके लिये अपने पिता नन्दबाबासे कहा॥ १२॥
वचो निशम्य नन्दस्य तथान्येषां व्रजौकसाम्।
इन्द्राय मन्युं जनयन् पितरं प्राह केशवः॥ १२
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! ब्रह्मा, शंकर आदिके भी शासन करनेवाले केशव भगवान्ने नन्दबाबा और दूसरे व्रजवासियोंकी बात सुनकर इन्द्रको क्रोध दिलानेके लिये अपने पिता नन्दबाबासे कहा॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.24.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 290) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/24/12/