श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

तदुपाकर्ण्य भगवान् प्रहस्य जगदीश्‍वरः।

व्याजहार पुनर्गोपान् दर्शयँल्लौकिकीं गतिम्॥ १३

tadupākarṇya bhagavān prahasya jagadīśvaraḥ|

vyājahāra punargopān darśayam̐llaukikīṃ gatim|| 13

अर्थ

उनकी बात सुनकर सारे जगत‍्के स्वामी भगवान् श्रीकृष्ण हँसने लगे। उन्होंने ग्वालबालोंको समझाया कि ‘संसारमें असफलता तो बार-बार होती ही है, उससे निराश नहीं होना चाहिये; बार-बार प्रयत्‍न करते रहनेसे सफलता मिल ही जाती है।’ फिर उनसे कहा—॥ १३॥

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