परीक्षित्! जब उन ब्राह्मणोंने ‘हाँ’ या ‘ना’—कुछ नहीं कहा, तब ग्वालबालोंकी आशा टूट गयी; वे लौट आये और वहाँकी सब बात उन्होंने श्रीकृष्ण तथा बलरामसे कह दी॥ १२॥
न ते यदोमिति प्रोचुर्न नेति च परंतप।
गोपा निराशाः प्रत्येत्य तथोचुः कृष्णरामयोः॥ १२
परीक्षित्! जब उन ब्राह्मणोंने ‘हाँ’ या ‘ना’—कुछ नहीं कहा, तब ग्वालबालोंकी आशा टूट गयी; वे लौट आये और वहाँकी सब बात उन्होंने श्रीकृष्ण तथा बलरामसे कह दी॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.23.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 282) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/23/12/