श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.22.15

दशम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

श्यामसुन्दर ते दास्यः करवाम तवोदितम्।

देहि वासांसि धर्मज्ञ नो चेद् राज्ञे ब्रुवामहे॥ १५

śyāmasundara te dāsyaḥ karavāma tavoditam|

dehi vāsāṃsi dharmajña no ced rājñe bruvāmahe|| 15

अर्थ

प्यारे श्यामसुन्दर! हम तुम्हारी दासी हैं। तुम जो कुछ कहोगे, उसे हम करनेको तैयार हैं। तुम तो धर्मका मर्म भलीभाँति जानते हो। हमें कष्ट मत दो। हमारे वस्त्र हमें दे दो; नहीं तो हम जाकर नन्दबाबासे कह देंगी’॥ १५॥✎ 1981

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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