श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.20.49

दशम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

वणिङ्मुनिनृपस्नाता निर्गम्यार्थान् प्रपेदिरे।

वर्षरुद्धा यथा सिद्धाः स्वपिण्डान् काल आगते॥ ४९

vaṇiṅmuninṛpasnātā nirgamyārthān prapedire|

varṣaruddhā yathā siddhāḥ svapiṇḍān kāla āgate|| 49

अर्थ

साधना करके सिद्ध हुए पुरुष जैसे समय आनेपर अपने देव आदि शरीरोंको प्राप्त होते हैं, वैसे ही वैश्य, संन्यासी, राजा और स्नातक—जो वर्षाके कारण एक स्थानपर रुके हुए थे—वहाँसे चलकर अपने-अपने अभीष्ट काम-काजमें लग गये॥ ४९॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे पूर्वार्धे प्रावृट्-
शरद्वर्णन नाम विंशतितमोऽध्यायः॥ २०॥

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