श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.19.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

वचो निशम्य कृपणं बन्धूनां भगवान् हरिः।

निमीलयत मा भैष्ट लोचनानीत्यभाषत॥ ११

vaco niśamya kṛpaṇaṃ bandhūnāṃ bhagavān hariḥ|

nimīlayata mā bhaiṣṭa locanānītyabhāṣata|| 11

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—अपने सखा ग्वाल-बालोंके ये दीनतासे भरे वचन सुनकर भगवान् श्रीकृष्णने कहा—‘डरो मत, तुम अपनी आँखें बंद कर लो’॥ ११॥✎ 1932

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1932 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): दावा-नलसे → दावानलसे

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