श्रीशुकदेवजी कहते हैं—अपने सखा ग्वाल-बालोंके ये दीनतासे भरे वचन सुनकर भगवान् श्रीकृष्णने कहा—‘डरो मत, तुम अपनी आँखें बंद कर लो’॥ ११॥✎ 1932
वचो निशम्य कृपणं बन्धूनां भगवान् हरिः।
निमीलयत मा भैष्ट लोचनानीत्यभाषत॥ ११
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—अपने सखा ग्वाल-बालोंके ये दीनतासे भरे वचन सुनकर भगवान् श्रीकृष्णने कहा—‘डरो मत, तुम अपनी आँखें बंद कर लो’॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.19.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 257) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/19/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1932 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): दावा-नलसे → दावानलसे