श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.18.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

तत्र चक्रुः परिवृढौ गोपा रामजनार्दनौ।

कृष्णसंघट्टिनः केचिदासन् रामस्य चापरे॥ २०

tatra cakruḥ parivṛḍhau gopā rāmajanārdanau|

kṛṣṇasaṃghaṭṭinaḥ kecidāsan rāmasya cāpare|| 20

अर्थ

उस खेलमें ग्वालबालोंने बलराम और श्रीकृष्णको नायक बनाया। कुछ श्रीकृष्णके साथी बन गये और कुछ बलरामके॥ २०॥

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