श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.18.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

तत्रोपाहूय गोपालान् कृष्णः प्राह विहारवित्।

हे गोपा विहरिष्यामो द्वन्द्वीभूय यथायथम्॥ १९

tatropāhūya gopālān kṛṣṇaḥ prāha vihāravit|

he gopā vihariṣyāmo dvandvībhūya yathāyatham|| 19

अर्थ

ग्वालबालोंमें सबसे बड़े खिलाड़ी, खेलोंके आचार्य श्रीकृष्ण ही थे। उन्होंने सब ग्वालबालोंको बुलाकर कहा—मेरे प्यारे मित्रो! आज हमलोग अपनेको उचित रीतिसे दो दलोंमें बाँट लें और फिर आनन्दसे खेलें॥ १९॥

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