श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! अब आनन्दित स्वजन सम्बन्धियोंसे घिरे हुए एवं उनके मुखसे अपनी कीर्तिका गान सुनते हुए श्रीकृष्णने गोकुलमण्डित गोष्ठमें प्रवेश किया॥ १॥
अथ कृष्णः परिवृतो ज्ञातिभिर्मुदितात्मभिः।
अनुगीयमानो न्यविशद् व्रजं गोकुलमण्डितम्॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! अब आनन्दित स्वजन सम्बन्धियोंसे घिरे हुए एवं उनके मुखसे अपनी कीर्तिका गान सुनते हुए श्रीकृष्णने गोकुलमण्डित गोष्ठमें प्रवेश किया॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.18.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 252) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/18/1/