श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.16.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

तं चण्डवेगविषवीर्यमवेक्ष्य तेन

दुष्टां नदीं च खलसंयमनावतारः।

कृष्णः कदम्बमधिरुह्य ततोऽतितुङ्ग-

मास्फोट्य गाढरशनो न्यपतद् विषोदे॥ ६

taṃ caṇḍavegaviṣavīryamavekṣya tena

duṣṭāṃ nadīṃ ca khalasaṃyamanāvatāraḥ|

kṛṣṇaḥ kadambamadhiruhya tato'tituṅga-

māsphoṭya gāḍharaśano nyapatad viṣode|| 6

अर्थ

परीक्षित्! भगवान्‌का अवतार तो दुष्टोंका दमन करनेके लिये होता ही है। जब उन्होंने देखा कि उस साँपके विषका वेग बड़ा प्रचण्ड (भयंकर) है और वह भयानक विष ही उसका महान् बल है तथा उसके कारण मेरे विहारका स्थान यमुनाजी भी दूषित हो गयी हैं, तब भगवान् श्रीकृष्ण अपनी कमरका फेंटा कसकर एक बहुत ऊँचे कदम्बके वृक्षपर चढ़ गये और वहाँसे ताल ठोंककर उस विषैले जलमें कूद पड़े॥ ६॥✎ 2075

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2075 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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