श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.16.45

दशम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

नमः कृष्णाय रामाय वसुदेवसुताय च।

प्रद्युम्‍नायानिरुद्धाय सात्वतां पतये नमः॥ ४५

namaḥ kṛṣṇāya rāmāya vasudevasutāya ca|

pradyumnāyāniruddhāya sātvatāṃ pataye namaḥ|| 45

अर्थ

आप शुद्धसत्त्वमय वसुदेवके पुत्र वासुदेव, संकर्षण एवं प्रद्युम्‍न और अनिरुद्ध भी हैं। इस प्रकार चतुर्व्यूहके रूपमें आप भक्तों तथा यादवोंके स्वामी हैं। श्रीकृष्ण! हम आपको नमस्कार करती हैं॥ ४५॥

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