परीक्षित्! चेतना आनेपर वे सब यमुनाजीके तटपर उठ खड़े हुए और आश्चर्यचकित होकर एक-दूसरेकी ओर देखने लगे॥ ५१॥✎ 2074
ते सम्प्रतीतस्मृतयः समुत्थाय जलान्तिकात्।
आसन् सुविस्मिताः सर्वे वीक्षमाणाः परस्परम्॥ ५१
परीक्षित्! चेतना आनेपर वे सब यमुनाजीके तटपर उठ खड़े हुए और आश्चर्यचकित होकर एक-दूसरेकी ओर देखने लगे॥ ५१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.15.51 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 237) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/15/51/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)