वीक्ष्य तान् वै तथा भूतान् कृष्णो योगेश्वरेश्वरः।
ईक्षयामृतवर्षिण्या स्वनाथान् समजीवयत्॥ ५०
vīkṣya tān vai tathā bhūtān kṛṣṇo yogeśvareśvaraḥ|
īkṣayāmṛtavarṣiṇyā svanāthān samajīvayat|| 50
अर्थ
उन्हें ऐसी अवस्थामें देखकर योगेश्वरोंके भी ईश्वर भगवान् श्रीकृष्णने अपनी अमृत बरसानेवाली दृष्टिसे उन्हें जीवित कर दिया। उनके स्वामी और सर्वस्व तो एकमात्र श्रीकृष्ण ही थे॥ ५०॥✎ 2074
वीक्ष्य तान् वै तथा भूतान् कृष्णो योगेश्वरेश्वरः।
ईक्षयामृतवर्षिण्या स्वनाथान् समजीवयत्॥ ५०
उन्हें ऐसी अवस्थामें देखकर योगेश्वरोंके भी ईश्वर भगवान् श्रीकृष्णने अपनी अमृत बरसानेवाली दृष्टिसे उन्हें जीवित कर दिया। उनके स्वामी और सर्वस्व तो एकमात्र श्रीकृष्ण ही थे॥ ५०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.15.50 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 237) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/15/50/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)