जिस दिन धेनुकासुर मरा, उसी दिनसे लोग निडर होकर उस वनके तालफल खाने लगे तथा पशु भी स्वच्छन्दताके साथ घास चरने लगे॥ ४०॥
अथ तालफलान्यादन् मनुष्या गतसाध्वसाः।
तृणं च पशवश्चेरुर्हतधेनुककानने॥ ४०
जिस दिन धेनुकासुर मरा, उसी दिनसे लोग निडर होकर उस वनके तालफल खाने लगे तथा पशु भी स्वच्छन्दताके साथ घास चरने लगे॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.15.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 236) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/15/40/