॥ श्रीहरिः ॥
तयोस्तत् सुमहत् कर्म निशाम्य विबुधादयः।
मुमुचुः पुष्पवर्षाणि चक्रुर्वाद्यानि तुष्टुवुः॥ ३९
tayostat sumahat karma niśāmya vibudhādayaḥ|
mumucuḥ puṣpavarṣāṇi cakrurvādyāni tuṣṭuvuḥ|| 39
अर्थ
बलरामजी और श्रीकृष्णकी यह मंगलमयी लीला देखकर देवतागण उनपर फूल बरसाने लगे और बाजे बजा-बजाकर स्तुति करने लगे॥ ३९॥
तयोस्तत् सुमहत् कर्म निशाम्य विबुधादयः।
मुमुचुः पुष्पवर्षाणि चक्रुर्वाद्यानि तुष्टुवुः॥ ३९
बलरामजी और श्रीकृष्णकी यह मंगलमयी लीला देखकर देवतागण उनपर फूल बरसाने लगे और बाजे बजा-बजाकर स्तुति करने लगे॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.15.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 236) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/15/39/